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Sahil, Shail Poetry, Pashto Poetry By Sahil


Khalaq Me Tol pa Tamasha she Ma salgai onesi
Che kala hum De gham Razi Rala Marai onesi,

Sta Tor Neqab ba sta Da speen makh parda Sng 0saati
Ranra tre bia Hum ozi Tandar che spogmai onesi,

Yar da aghyar pa Tash kato dase warmande Wahi
Laka Mashom Ta che pa laas k Sok Ropai onesi,

Mermann de wakhlam gharebai pa mung de sa ona kral
Bacho da mor gheg prekhe na we mazdorai oanese,

sahila daa sanga keday she che qabola na she
Che sta dua sara lasona lewanai onesi.

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प्रभु तुम मेरे मन की जानो ( Prabhu Tum Mere Man Ki Jano) - सुभद्रा कुमारी चौहान (Subhadra Kumari Chauhan)

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स्वदेश प्रेम (Swadesh Prem) - रामनरेश त्रिपाठी (Ramnaresh Tripathi)

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