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जिन्दगी


बाहों में हो फूल सदा ,

ये जरूरी तो नही ।

काँटों का दर्द भी ,

कभी तो सहना होगा।

राहों में छाव हो सदा,

ये जरूरी तो नहीं।

धुप की चुभन में,

कभी तो रहना होगा ।

हंसी खिलती रहे सदा ,

ये जरूरी तो नहीं।

पलकों पर जमे अश्को को,

कभी तो बहना होगा।

हर पल रहे खुशनुमा सदा,

ये जरूरी तो नहीं,

थम सी गयी है जिन्दगी,

कभी तो कहना होगा।

पूनम अग्रवाल.......

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