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कहर कोसी का "सजल जल"

नभ में जल है,
थल में जल है,
जल में जल है।

कैसी ये विडंबना ?
तरसे मानव जल को है।

भीगा तन है, भीगा मन है,
सूखे होंठ - गला रुंधा सा।
हर नयन मगर सजल है.....

पूनम अग्रवाल....

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