गगन मांगा
सूरज तो मिलना ही था।
सागर माँगा
मोती तो गिनना ही था।
बगीचा माँगा
फूल तो खिलना ही था।
जग माँगा
'प्रेम' तो मिलना ही था॥
poonam agrawal
छोड़ देते हैं मस्तियों को, नादानियों को नहीं देखते उन सपनों को जो सूरज और चांद को छूने का दिलासा दिलाते हैं दबा ...
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