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प्रेम

गगन मांगा

सूरज तो मिलना ही था।

सागर माँगा

मोती तो गिनना ही था।

बगीचा माँगा

फूल तो खिलना ही था।

जग माँगा

'प्रेम' तो मिलना ही था॥

poonam agrawal

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