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अब कभी न हंस पाएंगे ....

न कर ख्वाहिश मुझसे तू फिर उस शाम की।
अब वो अश आर कभी सुनाये ना जायेंगे ।

ए दोस्त! पहले ही एहसान बहुत हैं मुझपर,
मुझसे दुआ को अब हाथ उठाये न जायेंगे।

दिल की दुनिया में शिवाले बनाने की कमी है,
मेरे लब पे वो अफ़साने न कभी बिखर पायेंगे।

जिन्दगी तो मेरी बस खिजा बनकर रह गयी ,
अब अपने नजरे करम का नजराना न करा पाएंगे।

गम लेकर खुशियो को बाँट दिया है हमने ,
हर जगह रुस्वां हुये अब कभी न हंस पायेंगे.......

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